ऋग्वेद मंडल 1 सूक्त 47

ऋग्वेद मंडल 1 सूक्त 47. अश्विनीकुमारों का आह्वान, सोमपान और धन की प्रार्थना

ऋग्वेद के प्रथम मंडल का सूक्त 47 अश्विनीकुमारों को समर्पित है. इस सूक्त में ऋषि बार-बार अश्विनीकुमारों का आह्वान करते हैं और उनसे यज्ञ में आने, सोमपान करने, यजमान की रक्षा करने तथा धन और कल्याण प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं. उनके रथ और तीव्र गति का भी अनेक मंत्रों में उल्लेख मिलता है.

अश्विनीकुमारों का आह्वान

सूक्त के प्रारंभ में ऋषि अश्विनीकुमारों को यज्ञ में आने का निमंत्रण देते हैं.

वे उनसे निवेदन करते हैं कि वे यजमान की स्तुति सुनें और श्रद्धा से तैयार किए गए सोमरस का पान करें. उनके आगमन को यज्ञ की सफलता के लिए आवश्यक बताया गया है.

सोमपान का निमंत्रण

सूक्त में अनेक स्थानों पर अश्विनीकुमारों को सोमपान करने के लिए आमंत्रित किया गया है.

ऋषि कहते हैं कि मधुर सोमरस तैयार है और वे आकर उसका पान करें. इस विषय का बार-बार उल्लेख पूरे सूक्त में दिखाई देता है.

रथ का वर्णन

मंत्रों में अश्विनीकुमारों के रथ का विस्तार से वर्णन किया गया है.

उनके रथ की गति, उसके द्वारा यज्ञ तक पहुंचना तथा उनके शीघ्र आगमन की कामना व्यक्त की गई है. ऋषि चाहते हैं कि वे अपने रथ पर आरूढ़ होकर शीघ्र उनके पास आएं.

यज्ञ और हवि स्वीकार करने की प्रार्थना

सूक्त में अश्विनीकुमारों से यज्ञ में उपस्थित होकर हवि स्वीकार करने का निवेदन किया गया है.

ऋषि चाहते हैं कि वे यज्ञ को सफल बनाएं और यजमान की प्रार्थनाओं को स्वीकार करें.

धन और समृद्धि की कामना

मंत्रों में धन और समृद्धि प्राप्त होने की भी कामना की गई है.

ऋषि प्रार्थना करते हैं कि अश्विनीकुमार उन्हें धन, अन्न और आवश्यक साधन प्रदान करें. वे चाहते हैं कि उनके जीवन में समृद्धि बनी रहे.

रक्षा और सहायता

सूक्त में अश्विनीकुमारों से रक्षा की प्रार्थना भी की गई है.

ऋषि चाहते हैं कि वे यजमान की रक्षा करें और उस पर अपनी कृपा बनाए रखें. उनसे संकट के समय सहायता की भी कामना की गई है.

स्तुति सुनने का निवेदन

मंत्रों में बार-बार कहा गया है कि अश्विनीकुमार ऋषि की स्तुतियों को सुनें.

ऋषि चाहते हैं कि उनकी प्रार्थना देवताओं तक पहुंचे और वे उस पर प्रसन्न होकर यज्ञ में पधारें.

कल्याण की प्रार्थना

सूक्त के अंतिम मंत्रों में अश्विनीकुमारों से यजमान के कल्याण की प्रार्थना की गई है.

ऋषि उनसे निवेदन करते हैं कि वे सोमपान करें, यज्ञ में आएं और अपने भक्तों को सुख, समृद्धि तथा संरक्षण प्रदान करें.

पूरे सूक्त में अश्विनीकुमारों का आह्वान, सोमपान का निमंत्रण, उनके रथ का वर्णन, धन और समृद्धि की कामना तथा यजमान के संरक्षण की प्रार्थना प्रमुख रूप से दिखाई देती है.

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