ऋग्वेद मंडल 1 सूक्त 123. उषा की स्तुति और प्रकाश का वर्णन
ऋग्वेद मंडल 1 का सूक्त 123 उषा को समर्पित है. इस सूक्त में उषा के प्रतिदिन उदय होने, अपने प्रकाश से अंधकार को दूर करने और सूर्य के आगमन से पहले संसार को प्रकाशित करने का सुंदर वर्णन मिलता है.
उषा को प्रकाश प्रदान करने वाली, संसार को जागृत करने वाली और प्रतिदिन अपने निर्धारित क्रम से आने वाली देवी के रूप में प्रस्तुत किया गया है. सूक्त में उनके आने से अंधकार का नाश होने और मनुष्यों के निवास स्थानों की ओर प्रकाश के फैलने का वर्णन है.
इस सूक्त में उषा के सूर्य के साथ संबंध का भी वर्णन किया गया है. वह सूर्य के उदय से पहले आती हैं और सूर्य के प्रकाश के साथ उनका संबंध बताया गया है. उषा के रूप, उनके वस्त्र, उनकी गति और उनके प्रतिदिन लौटकर आने की विशेषता का भी वर्णन मिलता है.
मंत्र 1. उषा का प्रकाशमय आगमन
पृथू रथो दक्षिणाया अयोज्यैनं देवासो अमृतासो अस्थु:.
कृष्णा दुदस्थादर्या३ विहायाश्िकित्सन्ती मानुषाय क्षया
सरल हिंदी अर्थ
हे उषा. तुम अपने सुंदर रथ पर आरूढ़ होकर आती हो. तुम्हारे रथ में घोड़े जुते हुए हैं. तुम पूजा के योग्य देवताओं के यज्ञ में जाने के लिए आगे बढ़ती हो. तुम्हारा प्रकाश अंधकार से उत्पन्न होकर मनुष्यों के निवास स्थानों की ओर आता है.
सरल व्याख्या
सूक्त के पहले मंत्र में उषा के रथ और उनके आगमन का वर्णन किया गया है. उषा अपने रथ द्वारा आती हैं और उनके आने से अंधकार का निवारण होता है.
उनका आगमन केवल आकाश में प्रकाश के रूप में नहीं, बल्कि मनुष्यों के निवास स्थानों तक पहुंचने वाले प्रकाश के रूप में प्रस्तुत किया गया है.
मंत्र 2. उषा का प्रतिदिन पुनः आगमन
पूर्वा विश्वस्मादुभुवनादबोधि जयन्ती वाजं बृहती सनुत्री.
उच्चा व्यख्यद्युवति: पुनर्भुरोषा अगन्प्रथमा पूर्वहृ
सरल हिंदी अर्थ
हे उषा. तुम पहले भी आ चुकी हो और आज भी उसी प्रकार आती हो. जैसे पहले आती थीं, वैसे ही आगे भी आती रहो. तुम्हारा प्रकाश संसार को प्रसन्न करने वाला है और तुम्हारा आगमन नियमित रूप से होता है.
सरल व्याख्या
इस मंत्र में उषा के प्रतिदिन आने की विशेषता बताई गई है. वह एक बार आने के बाद समाप्त नहीं होतीं, बल्कि प्रत्येक दिन नए रूप में फिर आती हैं.
उषा के इस नियमित आगमन को सूर्य और दिन के क्रम से जोड़ा गया है.
मंत्र 3. उषा से प्रकाश की प्रार्थना
यदद्य भागं विभजासि नृभ्य उषो देवि मर्त्यत्रा सुजाते.
देवो नो अत्र सविता दमूना अनागसो वोचति सूर्याय..
सरल हिंदी अर्थ
हे उषा. तुम मनुष्यों के लिए प्रकाश लेकर आती हो. हमें वह प्रकाश प्रदान करो जिससे हम अपने यज्ञ और दैनिक कार्य कर सकें. सूर्य के आने से पहले तुम्हारा प्रकाश संसार में फैलता है.
सरल व्याख्या
इस मंत्र में उषा के प्रकाश को मनुष्यों के लिए उपयोगी बताया गया है. उनके आने से रात का अंधकार समाप्त होने लगता है.
उषा का प्रकाश सूर्य के पूर्ण उदय से पहले संसार को प्रकाशित करता है.
मंत्र 4. उषा का कल्याणकारी प्रकाश
गृहड़गृहमहना यात्यच्छा दिवेदिवे अधि नामा दधाना.
सिषासन्ती द्योतना शश्व॒दागादग्रमग्रमिद्धजते वसूनाम्
सरल हिंदी अर्थ
हे उषा. तुम अपनी सुंदर किरणों के साथ हमारे पास आती हो. तुम्हारा प्रकाश मनुष्यों के लिए कल्याणकारी है. तुम अपने आगमन से अंधकार को दूर करती हो और संसार को प्रकाशित करती हो.
सरल व्याख्या
यहां उषा की किरणों और उनके प्रकाश का वर्णन मिलता है. उनके आने से अंधकार हटता है और संसार प्रकाश से भरने लगता है.
उषा को यहां प्रकाश फैलाने वाली और मनुष्यों के लिए हितकारी देवी के रूप में संबोधित किया गया है.
मंत्र 5. उषा और सूर्य का संबंध
भगस्य स्वसा वरुणस्य जामिरुष: सूनृते प्रथमा जरस्व.
पश्चा स दघ्या यो अघस्य धाता जयेम त॑ दक्षिणया रथेन..
सरल हिंदी अर्थ
हे उषा. तुम सूर्य की पुत्री के समान उसके प्रकाश से जुड़ी हुई हो. तुम्हारे आने के बाद सूर्य का प्रकाश प्रकट होता है. तुम सूर्य के मार्ग पर आगे बढ़ती हुई संसार को प्रकाशित करती हो.
सरल व्याख्या
इस मंत्र में उषा और सूर्य के बीच संबंध का वर्णन मिलता है. उषा सूर्य के उदय से पहले आने वाली प्रकाशमयी शक्ति के रूप में सामने आती हैं.
उनका प्रकाश सूर्य के आगमन का संकेत देता है और संसार को दिन के लिए तैयार करता है.
मंत्र 6. उषा का सुंदर रूप
उदीरतां सुनृता उत्पुरन्धीरुदग्नय: शुशुचानासो अस्थु:.
स्पार्हा वसूनि तमसापगूव्ठहाविष्कृणवन्त्युषसों विभा
सरल हिंदी अर्थ
हे उषा. तुम सुंदर रूप धारण करके आती हो. तुम्हारे आने पर अंधकार दूर होता है और तुम्हारा प्रकाश चारों ओर फैलता है. तुम अपने उज्ज्वल रूप से संसार को प्रकाशित करती हो.
सरल व्याख्या
इस मंत्र में उषा के सुंदर और प्रकाशमय स्वरूप का वर्णन है. उनकी शोभा अंधकार के बीच विशेष रूप से दिखाई देती है.
उषा के प्रकाश के साथ दिन की शुरुआत होने लगती है.
मंत्र 7. उषा का नियमित क्रम
अपान्यदेत्यभ्यशन्यदेति विषुरूपे अहनी सं चरेते.
परिक्षितोस्तमो अन्या गुहाकरद्यौदुषा: शोशुचता रथे
सरल हिंदी अर्थ
हे उषा. तुम निश्चित समय पर आती हो और अपने निर्धारित मार्ग पर चलती हो. तुम्हारा आगमन नियमित है. तुम अपने प्रकाश से संसार के लोगों को प्रकाशित करती हुई आगे बढ़ती हो.
सरल व्याख्या
इस मंत्र में उषा की नियमितता पर बल दिया गया है. वह अपने निश्चित क्रम के अनुसार प्रतिदिन आती हैं.
उनका यह नियमित आगमन दिन और रात के क्रम को बनाए रखने से जुड़ा हुआ दिखाई देता है.
मंत्र 8. अंधकार का निवारण
सदृशीरद्य सदृशीरिद॒ श्वो दीर्घ सचन्ते वरुणस्य धाम.
अनवसलद्यास्त्रिंशतं योजनान्येकैका क्रतुं परि यन्ति सद्यः
सरल हिंदी अर्थ
हे उषा. तुम अंधकार से निकलकर अपने उज्ज्वल प्रकाश के साथ आती हो. तुम्हारी किरणें अंधकार को दूर करती हैं और तुम्हारे प्रकाश से संसार का मार्ग दिखाई देने लगता है.
सरल व्याख्या
उषा के प्रमुख कार्यों में अंधकार को दूर करना इस सूक्त का महत्वपूर्ण विषय है.
उनके आगमन से रात समाप्त होती है और प्रकाश फैलने लगता है. इस मंत्र में उषा की यही प्रकाशमयी शक्ति दिखाई देती है.
मंत्र 9. उषा का आगे बढ़ना
जानत्यह्नः प्रथमस्य नाम शुक्रा कृष्णादजनिष्ट श्वितीची.
ऋतस्य योषा न मिनाति धामाहरहर्निष्कृतमाचरन्ती
सरल हिंदी अर्थ
हे उषा. तुम एक वस्त्र धारण करने वाली कन्या के समान सुंदर होकर आती हो. तुम आगे बढ़ती हुई अपने प्रकाश से सभी को दिखाई देती हो और संसार को प्रकाशित करती हो.
सरल व्याख्या
इस मंत्र में उषा के स्वरूप को कन्या की उपमा से समझाया गया है. वह सुंदर, उज्ज्वल और आकर्षक रूप में प्रकट होती हैं.
उषा के आगे बढ़ने के साथ उनका प्रकाश भी फैलता जाता है.
मंत्र 10. सूर्य से पहले आने वाली उषा
कन्येव तन्वा३ शाशदानाँ एषि देवि देवमियक्षमाणम
संस्मयमाना युवति: पुरस्तादाविर्वक्षांसि कृणुषे विभा
सरल हिंदी अर्थ
हे उषा. तुम सूर्य के आने से पहले प्रकट होती हो. सूर्य जहां रहता है, उस दिशा की ओर तुम आगे बढ़ती हो. तुम्हारे आने से दिन की शुरुआत होती है और अंधकार पीछे हट जाता है.
सरल व्याख्या
इस मंत्र में उषा के सूर्य से पहले आने का वर्णन मिलता है. वह सूर्य के उदय से पहले आकाश में प्रकाश उत्पन्न करती हैं.
उषा और सूर्य का यह क्रम वैदिक वर्णन में महत्वपूर्ण है. उषा पहले आती हैं और उसके बाद सूर्य का प्रकाश अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देता है.
मंत्र 11. उषा की सुंदरता
सुसड्काशा मातृमृष्टेव योषाविस्तन्वं कृणुषे दुशे कम् भद्रा
त्वमुषो वितरं व्युच्छ न तत्ते अन्या उषसो नशन्त..
सरल हिंदी अर्थ
हे उषा. तुम अपने सुंदर रूप से प्रकट होती हो. तुम्हारा प्रकाश मनुष्यों को दिखाई देता है और तुम अपने मार्ग से आगे बढ़ती हुई सभी के लिए उज्ज्वलता लेकर आती हो.
सरल व्याख्या
इस मंत्र में उषा की सुंदरता और प्रकाश का वर्णन है. उनका रूप केवल आकाश तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उनके प्रकाश का प्रभाव चारों ओर दिखाई देता है.
उषा के आगमन से संसार में दिन का आरंभ होता है.
मंत्र 12. उषा का प्रकाश और संसार
अश्वावतीर्गोमतीर्विश्ववारा यतमाना रश्मिभि: सूर्यस्य.
परा च यन्ति पुनरा च यन्ति भद्रा नाम वहमाना उषास:..
सरल हिंदी अर्थ
हे उषा. तुम अपने प्रकाश से संसार को प्रकाशित करती हो. तुम्हारा आगमन मनुष्यों के लिए दिखाई देने वाला और कल्याणकारी है. तुम अंधकार को पीछे हटाकर अपने उज्ज्वल रूप से संसार के सामने आती हो.
सरल व्याख्या
इस मंत्र में उषा के प्रकाश का विस्तार बताया गया है. वह अंधकार को हटाती हुई संसार के सामने प्रकट होती हैं.
उषा का प्रकाश मनुष्यों के निवास और उनके दैनिक जीवन के लिए महत्वपूर्ण रूप में वर्णित है.
मंत्र 13. उषा की अंतिम स्तुति
ऋतस्य रश्मिमनुयच्छमाना भद्रम्भद्रं ऋतुमस्मासु धेहि.
उषो नो अद्य सुहवा व्युछास्मायु रायो मघवत्सु च स्युः..
सरल हिंदी अर्थ
हे उषा. तुम सूर्य की किरणों के अनुकूल चलती हुई हमारे पास आती हो. तुम्हारी वृद्धि ऐसी हो कि हम यज्ञ और स्तुति के द्वारा अपना कल्याण कर सकें. हमारे द्वारा किए गए आह्वान से अंधकार का नाश करो. धन से युक्त होकर तुम यजमान के पास अनेक प्रकार की संपत्ति लेकर आती हो.
सरल व्याख्या
अंतिम मंत्र में उषा से प्रकाश, अंधकार के निवारण और यजमान के कल्याण की प्रार्थना की गई है. उषा सूर्य की किरणों के अनुकूल आगे बढ़ती हैं और अपने साथ प्रकाश लेकर आती हैं.
मंत्र में धन और संपत्ति का भी उल्लेख है. इस प्रकार सूक्त का समापन उषा की स्तुति और उनके प्रकाश से कल्याण की प्रार्थना के साथ होता है.
सूक्त 123 का सार
ऋग्वेद मंडल 1 का सूक्त 123 उषा के उदय और उनके प्रकाशमय स्वरूप का वर्णन करने वाला सूक्त है.
उषा प्रतिदिन अपने निश्चित क्रम से आती हैं. उनके आगमन से रात का अंधकार दूर होता है और संसार में प्रकाश फैलता है. उनके रथ, घोड़ों, किरणों और सुंदर स्वरूप का वर्णन सूक्त में विभिन्न रूपों में किया गया है.
सूक्त में उषा और सूर्य का संबंध भी प्रमुख रूप से दिखाई देता है. उषा सूर्य के आगमन से पहले आती हैं और सूर्य के प्रकाश के लिए मार्ग तैयार करती हुई दिखाई देती हैं.
उषा को सुंदर कन्या के समान, प्रकाश धारण करने वाली और अपने निर्धारित मार्ग पर चलने वाली देवी के रूप में प्रस्तुत किया गया है. उनके आने से मनुष्यों के निवास स्थान प्रकाशित होते हैं और दिन का आरंभ होता है.
अंतिम मंत्र में उषा से अंधकार दूर करने, यजमान का कल्याण करने और धन-संपत्ति प्रदान करने की प्रार्थना की गई है.