श्रीमद्भागवत महापुराण स्कंध 1 अध्याय 19: परीक्षित का अंतिम समय और शुकदेव जी का आगमन
पिछले अध्याय में हमने देखा कि कैसे राजा परीक्षित को श्राप मिला और उन्होंने वैराग्य को स्वीकार करते हुए गंगा तट पर अपने अंतिम समय को भगवान के स्मरण में बिताने का निर्णय लिया. इस प्रसंग को विस्तार से समझने के लिए आप यह लेख पढ़ सकते हैं: राजा परीक्षित का श्राप और भागवत कथा…