ऋग्वेद मंडल 1 सूक्त 35. सविता देव का प्रकाश और मार्गदर्शन
ऋग्वेद के प्रथम मंडल का सूक्त 35 सविता देव को समर्पित है. इस सूक्त में सविता के उदय, उनके प्रकाश, उनके द्वारा जगत के संचालन तथा जीवों को उनके-अपने कार्यों में प्रवृत्त करने का वर्णन किया गया है. ऋषि सविता से रक्षा, कल्याण और उचित मार्गदर्शन की प्रार्थना भी करते हैं.
सविता का आह्वान
सूक्त के प्रारंभ में ऋषि सविता का आह्वान करते हैं.
वे बताते हैं कि यज्ञ और स्तुति के द्वारा सविता को बुलाया जाता है. साथ ही अग्नि, मित्र और रात्रि का भी उल्लेख करते हुए सविता की कृपा की कामना की गई है.
ऋषि चाहते हैं कि सविता उनके यज्ञ को स्वीकार करें और उन पर प्रसन्न हों.
सविता का उदय और प्रकाश
सूक्त में सविता के उदय का सुंदर वर्णन मिलता है.
कहा गया है कि सविता अंधकार से भरे आकाश में भ्रमण करते हुए देवों और मनुष्यों को उनके कार्यों में प्रवृत्त करते हैं. उनके आने से प्रकाश फैलता है और संसार में गतिविधियां आरंभ होती हैं.
इन मंत्रों में सविता को जगत को जागृत करने वाली शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया है.
जीवों को उनके कार्यों में प्रवृत्त करना
कई मंत्रों में कहा गया है कि सविता अपनी प्रेरणा से लोगों को उनके कार्यों में लगाते हैं.
जब सविता उदित होते हैं तब मनुष्य अपने-अपने कार्यों में प्रवृत्त होते हैं. उनके प्रभाव से जीवन की गतिविधियां आगे बढ़ती हैं.
यह भाव सूक्त के महत्वपूर्ण विषयों में से एक है.
रात्रि और दिन का वर्णन
सूक्त में दिन और रात्रि दोनों का उल्लेख मिलता है.
सविता के उदय के साथ दिन का विस्तार होता है और रात्रि अपने स्थान को छोड़ देती है. इस प्रकार समय के परिवर्तन और उसके क्रम का वर्णन इन मंत्रों में किया गया है.
सविता का व्यापक प्रभाव
ऋषि बताते हैं कि सविता का प्रभाव आकाश, पृथ्वी और अन्य लोकों तक फैला हुआ है.
वे दूर-दूर तक प्रकाश फैलाते हैं और अपने तेज से संसार को प्रकाशित करते हैं. उनके कारण अनेक जीव अपने कार्यों में लगे रहते हैं.
नदियों और वायु का उल्लेख
सूक्त में नदियों और वायु का भी उल्लेख मिलता है.
ऋषि कहते हैं कि सविता की प्रेरणा से विभिन्न शक्तियां अपने-अपने कार्यों का पालन करती हैं. इस वर्णन में प्रकृति के विभिन्न तत्वों का उल्लेख दिखाई देता है.
अंधकार को दूर करने वाले सविता
कई मंत्रों में सविता के प्रकाश का वर्णन है.
उनके उदय होने पर अंधकार दूर होता है और संसार प्रकाश से भर जाता है. उनके तेज का प्रभाव आकाश और पृथ्वी दोनों पर दिखाई देता है.
सुरक्षा और कल्याण की प्रार्थना
सूक्त के अंतिम भाग में ऋषि सविता से रक्षा की प्रार्थना करते हैं.
वे चाहते हैं कि सविता उन्हें सुरक्षित रखें और उनके लिए कल्याणकारी मार्ग प्रशस्त करें. साथ ही उनसे देवताओं तक अपनी प्रार्थना पहुंचाने का भी निवेदन करते हैं.
पूरे सूक्त में सविता के प्रकाश, उनके उदय, संसार को प्रेरित करने की शक्ति तथा उनके द्वारा प्रदान किए जाने वाले संरक्षण और कल्याण का वर्णन प्रमुख रूप से मिलता है.