ऋग्वेद मंडल 1 सूक्त 124

ऋग्वेद मंडल 1 सूक्त 124. उषा की स्तुति और प्रकाशमय स्वरूप

ऋग्वेद मंडल 1 का सूक्त 124 उषा को समर्पित है. इस सूक्त में उषा के प्रतिदिन होने वाले आगमन, उनके प्रकाशमय स्वरूप, अंधकार के निवारण और सूर्य के साथ उनके संबंध का वर्णन मिलता है.

उषा को प्रतिदिन आने वाली, मनुष्यों के लिए प्रकाश लेकर आने वाली और संसार को प्रकाशित करने वाली देवी के रूप में प्रस्तुत किया गया है. वह पूर्व दिशा से आती हैं और अपने प्रकाश से अंधकार को दूर करती हैं.

इस सूक्त में उषा की तुलना छोटी बहन से बड़ी बहन के समान की गई है. वह अपने निर्धारित स्थान पर आकर पहले से आने वाली उषाओं के समान दिखाई देती हैं. उनके आगमन से पक्षी अपने घोंसलों से निकलते हैं और मनुष्य अपने कार्यों में लग जाते हैं.

सूक्त में उषा को सूर्य की किरणों के साथ चलने वाली और अपने प्रकाश से संसार को प्रकाशित करने वाली बताया गया है. उनके आने पर अंधकार समाप्त होता है. उषा का प्रकाश मनुष्यों के लिए दिखाई देता है और वे यजमान के लिए धन तथा कल्याण की कामना से जुड़ी हुई हैं.

मंत्र 1. उषा का प्रातःकालीन आगमन

उषा उच्छन्ती समिधाने अग्ना उद्यन्त्सूर्य उर्विया ज्योतिरश्रेत्‌.
देवो नो अत्र सविता न्वर्थ प्रासावीद्‌ द्विपत्प्र चतुष्पदि

सरल हिंदी अर्थ

हे उषा. तुम प्रातःकाल अग्नि के प्रज्वलित होने पर अंधकार को दूर करती हुई उदित होती हो और उदित होते हुए सूर्य के समान प्रचुर प्रकाश फैलाती हो. तुम साविता देव के लिए मनुष्यों और पशुओं के आने-जाने के व्यवहार का मार्ग प्रशस्त करती हो.

सरल व्याख्या

सूक्त के पहले मंत्र में उषा के प्रातःकालीन आगमन का वर्णन है. वह अग्नि के प्रज्वलित होने के समय आती हैं और अपने प्रकाश से अंधकार को दूर करती हैं.

उनके आने से मनुष्यों और पशुओं के आवागमन का क्रम आरंभ होता है. इस प्रकार उषा को दिन के आरंभ से जुड़ी हुई देवी के रूप में प्रस्तुत किया गया है.

मंत्र 2. उषा का मनुष्यों के लिए प्रकाश

अमिनती दैव्यानि व्रतानि प्रमिनती मनुष्या युगानि.
ईयुषीणामुपमा शश्वतीनामायतीनां प्रथमोषा व्यद्यौ

सरल हिंदी अर्थ

हे उषा. तुम प्रतिदिन मनुष्यों के लिए प्रकाश लेकर आती हो. तुम पहले भी आती रही हो और आगे भी आती रहोगी. तुम्हारा प्रकाश अंधकार को दूर करता है और संसार को प्रकाशित करता है.

सरल व्याख्या

इस मंत्र में उषा के नियमित आगमन का वर्णन मिलता है. वह प्रतिदिन आती हैं और अपने प्रकाश से संसार को प्रकाशित करती हैं.

उनका आगमन केवल वर्तमान समय तक सीमित नहीं है. पहले भी उषाएं आई हैं और आगे भी आने वाली उषाओं का क्रम जारी रहेगा.

मंत्र 3. उषा का विस्तार और प्रकाश

एषा दिवो दुहिता प्रत्यदर्शि ज्योतिर्वसाना समना
पुरस्तात्‌ ऋतस्य पन्थामन्वेति साधु प्रजानतीव न दिशो मिनाति..

सरल हिंदी अर्थ

हे उषा. तुम अपने प्रकाशमय रूप से आकाश में फैलती हो और मनुष्यों के लिए प्रकाश का विस्तार करती हो. तुम्हारे आने से संसार में दिखाई देने वाला प्रकाश बढ़ता है.

सरल व्याख्या

इस मंत्र में उषा के प्रकाश के विस्तार का वर्णन है. उषा अपने प्रकाश से आकाश और संसार को प्रकाशित करती हैं.

उनका प्रकाश मनुष्यों के लिए स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाला है और उनके आगमन के साथ अंधकार पीछे हटता जाता है.

मंत्र 4. उषा का सूर्य के मार्ग पर चलना

उपो अदर्शि शुन्ध्युवो न वक्षो नोधा इवाविरकृत प्रियाणि.
अद्मयसन्न ससतो बोधयन्ती शश्चत्तमागात्पुनरेयुषीणा

सरल हिंदी अर्थ

हे उषा. तुम पूर्व दिशा से आती हुई सूर्य के मार्ग पर आगे बढ़ती हो. तुम अपने प्रकाशमय रूप से संसार के सामने प्रकट होती हो और अपने निर्धारित मार्ग को कभी समाप्त नहीं करती.

सरल व्याख्या

इस मंत्र में उषा के पूर्व दिशा से आने और सूर्य के साथ उनके संबंध का वर्णन मिलता है.

उषा सूर्य के मार्ग पर आगे बढ़ती हुई दिखाई देती हैं. उनका आगमन नियमित है और वह अपने निश्चित मार्ग पर चलती हैं.

मंत्र 5. उषा का सुंदर और प्रकाशमय रूप

पूर्वे अर्ध रजसो अप्त्सस्य गवां जनित्र्यकृत प्र केतुम.
व्यु प्रथते वितरं वरीय ओभा पृणन्ती पित्रोरुपस्था.

सरल हिंदी अर्थ

हे उषा. तुम अपने सुंदर रूप को प्रकट करती हुई हमारे सामने आती हो. तुम्हारा प्रकाश अंधकार को दूर करता है और तुम्हारी शोभा संसार में फैलती है.

सरल व्याख्या

इस मंत्र में उषा के सुंदर रूप का वर्णन किया गया है. वह अपने प्रकाशमय स्वरूप के साथ प्रकट होती हैं.

उनका आगमन अंधकार के अंत और प्रकाश की शुरुआत से जुड़ा हुआ है.

मंत्र 6. उषा का सूर्य के समान प्रकाश

एवेदेषा पुरुतमा दृशे क॑ नाजामिं न परि वृणक्ति जामिम्‌.
अरेपसा तन्वा३ शाशदाना नार्भादीषते न महो विभाती..

सरल हिंदी अर्थ

जिस प्रकार सूर्य अपनी किरणों के समूह को प्रकट करता है और नोधा ऋषि ने अपने प्रिय मंत्र को प्रकट किया था, उसी प्रकार उषा अपने प्रकाश को सबके सामने प्रकट करती है. वह गृहिणी के समान सबसे पहले जागकर आगे बढ़ती है और प्रातःकाल आने वाली युवतियों में सबसे सुंदर दिखाई देती है.

सरल व्याख्या

यह मंत्र उषा के प्रकाशमय और सुंदर स्वरूप का विस्तृत वर्णन करता है. उषा के प्रकाश की तुलना सूर्य की किरणों से की गई है.

उन्हें गृहिणी के समान सबसे पहले जागने वाली और दूसरों से पहले आगे बढ़ने वाली बताया गया है.

मंत्र 7. उषा और विस्तृत आकाश

अभ्रातेव पुसं एति प्रतीची गर्तारुगिव सनये धनानाम्‌.
जायेव पत्य उशती सुवासा उषा हस्नेव नि रिणीते अप्स:..

सरल हिंदी अर्थ

हे उषा. तुम विस्तृत आकाश के पूर्वी भाग में जन्म लेकर दिशाओं का ज्ञान कराती हो. पृथ्वी और आकाश तुम्हारे पिता के समान हैं. तुम इन दोनों के बीच स्थित होकर अपने अत्यंत विस्तृत रूप से प्रसिद्ध होती हो.

सरल व्याख्या

इस मंत्र में उषा के जन्मस्थान और उनके व्यापक प्रकाश का वर्णन है. उन्हें विस्तृत आकाश के पूर्वी भाग से संबंधित बताया गया है.

पृथ्वी और आकाश को उनके पिता के समान कहा गया है और उषा को इन दोनों के बीच स्थित होकर प्रकाशित होने वाली बताया गया है.

मंत्र 8. उषा का अंधकार दूर करना

स्वसा स्वस्रे ज्यायस्यै योनिमारैगपैत्यस्या: प्रतिचक्ष्येव.
व्युच्छन्ती रश्मिभि: सूर्यस्याउज्यड्क्ते समनगा इव

सरल हिंदी अर्थ

हे उषा. तुम अपने जातिगत देवताओं और विजयी मनुष्यों सभी के लिए प्रकाश प्राप्त कराती हो. तुम्हें देखकर लोग प्रसन्न होते हैं. तुम्हारा निर्मल शरीर दिखाई देता है और तुम अंधकार के पास नहीं रुकती हो.

सरल व्याख्या

इस मंत्र में उषा के निर्मल शरीर और प्रकाशमय स्वरूप का वर्णन मिलता है. उनके आने से अंधकार समाप्त होता है.

उषा के प्रकाश से देवताओं और मनुष्यों को प्रकाश प्राप्त होता है.

मंत्र 9. छोटी बहन और बड़ी बहन के समान उषाएं

बज रद पूर्वासामहसु पूर्वामभ्येति पश्चात्‌,
ताः रेवदुच्छन्तु सुदिना उषास

सरल हिंदी अर्थ

उषा छोटी बहन के समान अपनी बड़ी बहन का स्थान लेकर चली जाती है. सूर्य अपनी किरणों से अंधकार का नाश करता हुआ संसार को प्रकाशित करता है. उषा के आने के बाद मनुष्य अपने कार्यों में लग जाते हैं.

सरल व्याख्या

इस मंत्र में उषाओं के क्रम का सुंदर वर्णन है. एक उषा के बाद दूसरी उषा आती है. छोटी बहन के बड़ी बहन का स्थान लेने की उपमा इसी क्रम को समझाती है.

सूर्य की किरणें अंधकार का नाश करती हैं और उषा के आगमन के साथ संसार में दैनिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं.

मंत्र 10. उषा का प्रतिदिन नया रूप

प्र बोधयोष: पृणतो मघोन्यबुध्यमाना: पणय: ससन्तु.
रेवदुच्छ मघवद्भ्यो मघोनि रेवत्स्तोत्रे सूनूते जारयन्ती

सरल हिंदी अर्थ

उषाएं परस्पर बहनों के समान हैं और एक-दूसरी के पीछे आती हैं. आने वाली उषाएं प्राचीन उषाओं के समान हैं. वे दिन-प्रतिदिन नए प्रकाश के साथ आती हुई हमें समृद्ध करें.

सरल व्याख्या

इस मंत्र में उषाओं के लगातार आने का वर्णन किया गया है. एक उषा के बाद दूसरी उषा आती है और यह क्रम लगातार चलता रहता है.

प्राचीन उषाओं के समान नई उषाएं भी प्रतिदिन आती हैं. उनसे समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना की गई है.

मंत्र 11. उषा और मनुष्यों का जागरण

अवेयमश्वैद्युवति: पुरस्ताग्युड्क्ते गवामरुणानामनीक
वि नूनमुच्छादसति प्र केतुर्गृहंगृहमुप तिष्ठाते अग्नि

सरल हिंदी अर्थ

हे उषा. तुम धन देने वाली हो और मनुष्यों को उनके कार्यों के लिए जगाती हो. तुम्हारे आने पर पक्षी अपने घोंसलों से निकलते हैं और मनुष्य अपने-अपने कार्यों में लग जाते हैं. हे देवी उषा. जो यजमान देवयजन मंडप में स्थित है, उसके लिए पर्याप्त धन प्रदान करो.

सरल व्याख्या

यह मंत्र उषा के आगमन और मनुष्यों तथा पक्षियों के जागरण के बीच संबंध बताता है.

उषा के आते ही पक्षी अपने घोंसलों से निकलते हैं और मनुष्य अपने कार्यों की ओर बढ़ते हैं. इसी मंत्र में यजमान के लिए पर्याप्त धन की प्रार्थना भी की गई है.

मंत्र 12. उषा से स्तुति और रक्षा की प्रार्थना

उत्ते वयश्रिद्वसतेरपप्तन्नरश्न ये पितुभाजो व्युष्टौ.
अमा सते वहसि भूरि वाममुषो देवि दाशुषे मर्त्याय.

सरल हिंदी अर्थ

हे स्तुति योग्य उषाओ. मेरे मंत्र तुम्हारी स्तुति करें. तुम हमारी उन्नति और वृद्धि की इच्छा को पूरा करो. हे उषा देवियो. यदि तुम हमारी रक्षा करो तो हमें हजारों और सैकड़ों धन प्राप्त हो सकते हैं.

सरल व्याख्या

इस मंत्र में उषाओं से सीधे प्रार्थना की गई है. स्तोता चाहता है कि उसकी स्तुति उषा तक पहुंचे और उषा उसकी वृद्धि में सहायक हों.

उनसे रक्षा करने और धन की प्राप्ति कराने की कामना की गई है.

मंत्र 13. उषा का प्रकाशमय आगमन

अस्तोढ्वं स्तोम्या ब्रह्मणा मे 5वीवृधध्वमुशतीरुषास:.
युष्माकं देवीरवसा सनेम सहस्रिणं च शतिनं च वाजम्‌.

सरल हिंदी अर्थ

हे उषा. तुम प्रातःकाल पूर्व दिशा से आती हो और अपने प्रकाश से आकाश को प्रकाशित करती हो. तुम मनुष्यों के बीच अपनी शोभा फैलाती हुई आगे बढ़ती हो. तुम्हारे आने पर पक्षी उड़ने लगते हैं और मनुष्य अपने कार्यों में लग जाते हैं.

सरल व्याख्या

अंतिम मंत्र में उषा के आगमन और उनके प्रकाश का फिर से वर्णन किया गया है. पूर्व दिशा से आने वाली उषा अपने प्रकाश से संसार को प्रकाशित करती हैं.

सूक्त 124 का सार

ऋग्वेद मंडल 1 का सूक्त 124 उषा की स्तुति, उनके प्रकाश और प्रतिदिन होने वाले आगमन का वर्णन करता है.

उषा प्रातःकाल आती हैं और अंधकार को दूर करके संसार को प्रकाशित करती हैं. उनके आगमन के साथ मनुष्यों और पशुओं के आवागमन का क्रम शुरू होता है. पक्षी अपने घोंसलों से निकलते हैं और मनुष्य अपने दैनिक कार्यों में लग जाते हैं.

सूक्त में उषा को पूर्व दिशा से आने वाली और सूर्य के मार्ग पर आगे बढ़ने वाली बताया गया है. उनके प्रकाश और सूर्य की किरणों के बीच संबंध भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है.

उषाओं को एक-दूसरे की बहनों के समान बताया गया है. एक उषा के बाद दूसरी उषा आती है और यह क्रम निरंतर चलता रहता है. इस कारण उषा का आगमन प्रतिदिन नया होते हुए भी प्राचीन क्रम का हिस्सा है.

सूक्त के अंतिम भाग में उषा से स्तोता की वृद्धि, रक्षा, धन और कल्याण की प्रार्थना की गई है.

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