ऋग्वेद मंडल 1 सूक्त 116. अश्विनीकुमारों की स्तुति और उनके दिव्य कार्य
ऋग्वेद मंडल 1 का सूक्त 116 अश्विनीकुमारों को समर्पित है. इस सूक्त में अश्विनीकुमारों की स्तुति करते हुए उनके द्वारा किए गए अनेक कार्यों का वर्णन मिलता है.
उपलब्ध स्रोत में इस सूक्त के मंत्रों में अश्विनीकुमारों को ऐसे देवताओं के रूप में प्रस्तुत किया गया है जो अपने भक्तों की सहायता करते हैं, संकट में रक्षा करते हैं, जल से संबंधित कार्य करते हैं, वृद्ध को पुनः समर्थ बनाते हैं, कुएं से जल उपलब्ध कराते हैं, संकट में फंसे लोगों को बचाते हैं और विभिन्न व्यक्तियों की इच्छाओं को पूरा करते हैं.
यह सूक्त विशेष रूप से अपने अनेक आख्यानात्मक प्रसंगों के कारण महत्वपूर्ण है. अलग-अलग मंत्रों में किसी व्यक्ति, ऋषि, राजा या अन्य पात्र के लिए अश्विनीकुमारों द्वारा किए गए विशिष्ट कार्यों का वर्णन मिलता है.
मंत्र 1. अश्विनीकुमारों का यज्ञ और स्तुति से संबंध
मंत्र
नासत्याभ्यां बर्हिरिव प्र वृज्जे स्तोमाँ इयर्म्यश्रियेव वात:.
यावर्भगाय विमदाय जायां सेनाजुवा न्यूहतू रथेन.
सरल हिंदी अर्थ
हे अश्विनीकुमारों. जिस प्रकार कोई यजमान यज्ञ के लिए कुश बिछाता है और वायु बादलों के जल को प्रेरित करता है, उसी प्रकार आपकी पर्याप्त स्तुति की जाती है. आपने किशोर विमद को अपने रथ द्वारा शत्रुओं से पहले पहुंचकर पत्नी प्रदान कराई थी.
सरल व्याख्या
इस मंत्र में अश्विनीकुमारों की स्तुति की गई है और उनके द्वारा विमद नामक व्यक्ति की सहायता किए जाने का उल्लेख है. स्रोत के अनुसार अश्विनीकुमार अपने रथ द्वारा विमद के पास पहले पहुंचकर उसे पत्नी प्रदान कराते हैं.
मंत्र 2. अश्विनीकुमारों की शीघ्रगामी शक्ति
वीछुपत्मभिराशुहेमभिर्वा देवानां वा जूतिभि: शाशदाना.
तद्रासभो नासत्या सहस्रमाजा यमस्य प्रधने जिगाय..
सरल हिंदी अर्थ
हे अश्विनीकुमारों. तुम बलपूर्वक उठने वाले और शीघ्रगामी अश्वों तथा इंद्र आदि देवताओं की प्रेरणाओं से प्रेरित होकर आते हो. तुम्हारा वाहन रमणीय और इंद्र को प्रसन्न करने वाला है तथा तुम युद्ध में बहुत विजय प्राप्त करने वाले हो.
सरल व्याख्या
इस मंत्र में अश्विनीकुमारों के शीघ्र आने वाले स्वरूप का वर्णन किया गया है. उनके रथ और अश्वों को तेज गति वाला बताया गया है. साथ ही उनकी युद्ध में विजय प्राप्त करने की शक्ति का भी उल्लेख मिलता है.
मंत्र 3. भुज्यु की समुद्र से रक्षा
तुग्रो ह भुज्युमश्विनोदमेघे रयिं न कश्चिन्ममृवाँ अवाहा:.
तमूहथुनौभिरात्मन्वतीभिरन्तरिक्षप्रुद्धिरपोद
सरल हिंदी अर्थ
हे अश्विनीकुमारों. जिस प्रकार कोई मरता हुआ व्यक्ति धन का त्याग करता है, उसी प्रकार शत्रुपीड़ित भुज्यु ने अपने पुत्र की इच्छा से समुद्र में जाने का प्रयास किया. तुमने समुद्र में डूबते हुए भुज्यु को अपने रथ से सहायता पहुंचाई और उसे समुद्र से बाहर निकाला.
सरल व्याख्या
यह मंत्र भुज्यु के संकट का वर्णन करता है. वह समुद्र में संकट में पड़ गया था. अश्विनीकुमारों ने उसकी सहायता की और उसे अपने रथ द्वारा समुद्र से बचाया. यह सूक्त में वर्णित अश्विनीकुमारों के प्रमुख सहायता-कार्य में से एक है.
मंत्र 4. भुज्यु को समुद्र से निकालना
तिस्र: क्षपस्रिरहातिव्रजद्धिनासत्या भुज्युमूहथु: पतद्रैः.
समुद्रस्य धन्वन्नार्द्रस्य पारे त्रिभी रथैः शतपद्धि: षब्ठश्वैः..
सरल हिंदी अर्थ
हे अश्विनीकुमारों. तुमने भुज्यु को सौ पतवारों वाली और कुछ घोड़ों से खींची जाने वाली नौका में बैठाकर तीन दिन और तीन रात से अधिक समय तक चलते हुए समुद्र के जल के उस पार पहुंचाया.
सरल व्याख्या
पिछले मंत्र में भुज्यु की समुद्र से रक्षा का उल्लेख था. इस मंत्र में उस घटना का और विस्तार मिलता है. स्रोत के अनुसार अश्विनीकुमारों ने भुज्यु को नौका द्वारा समुद्र पार पहुंचाया.
मंत्र 5. भुज्यु को सुरक्षित घर पहुंचाना
अनारम्भणे तदवीरयेथामनास्थाने अग्रभणे समुद्रे.
यदश्चिना ऊहथुर्भुज्युमस्तं शतारित्रां नावमातस्थिवां
सरल हिंदी अर्थ
हे अश्विनीकुमारों. तुमने समुद्र में डूबते हुए भुज्यु को नौका में बैठाकर उसके घर पहुंचाया. वह नौका पृथ्वी के समान दृढ़ थी और उसमें हाथ से पकड़ने योग्य शाखा आदि का सहारा था. इसी प्रकार तुमने यह कार्य किया.
सरल व्याख्या
इस मंत्र में भुज्यु की रक्षा के प्रसंग को आगे बढ़ाया गया है. अश्विनीकुमारों ने उसे केवल समुद्र से बचाया ही नहीं, बल्कि उसके घर तक पहुंचाया.
मंत्र 6. अश्विनीकुमारों द्वारा खेत और अश्व प्रदान करना
यमश्विना ददथु: श्वेतमश्वमघाश्वाय शश्वदित्स्वस्ति.
ठद्वां दात्रं महि कीर्तेन्यं भूत्पैद्वो वाजी सदमिद्ध॒व्यो अर्य:
सरल हिंदी अर्थ
हे अश्विनीकुमारों. तुमने अधार्य नामक व्यक्ति को फल देने वाला खेत और अक्षय धन दिया. तुम्हारा वह दिया हुआ दान महान और प्रशंसनीय है तथा वह उत्तम अश्व के समान आदरणीय है.
सरल व्याख्या
इस मंत्र में अश्विनीकुमारों के दानशील स्वरूप का वर्णन है. स्रोत में उनके द्वारा अधार्य को खेत और अक्षय धन दिए जाने का उल्लेख है.
मंत्र 7. वीरों और युद्ध में सहायता
युवं नरा स्तुवते पञ्रियाय कक्षीवते अरदतं पुरन्धिम्,
कारोतराच्छफाददश्वस्य वृष्ण: शतं कुंभाँ असिज्चतं सुरा
सरल हिंदी अर्थ
हे अश्विनीकुमारों. तुमने स्तुति करने वाले अत्रि ऋषि को पर्याप्त बुद्धि प्रदान की. जैसे कोई व्यक्ति शर से बनाए गए पात्र को भरता है, वैसे ही तुमने उसे बुद्धि और सामर्थ्य से भर दिया.
सरल व्याख्या
इस मंत्र में अत्रि ऋषि का उल्लेख मिलता है. अश्विनीकुमारों से अत्रि के लिए पर्याप्त बुद्धि और सहायता की प्रार्थना की गई है.
मंत्र 8. अग्नि से अत्रि की रक्षा
हिमेनाग्निं प्रंसमवारयेथां पितुमतीमूर्जमस्मा अधरत्तं.
ऋगबीसे अत्रिमश्विनावनीतमुन्निन्यथु: सर्वगणं स्वस्ति
सरल हिंदी अर्थ
हे अश्विनीकुमारों. तुमने ठंडे जल से उस अग्नि को बुझाया जो असुरों द्वारा अत्रि को पीड़ा देने के लिए जलाई गई थी. तुमने अत्रि को उस अग्नि से बचाया और उसे उसके साथियों सहित सुरक्षित किया.
सरल व्याख्या
इस मंत्र में अत्रि ऋषि से जुड़ा एक संकट वर्णित है. असुरों ने उन्हें पीड़ा देने के लिए अग्नि जलाई थी. अश्विनीकुमारों ने जल की सहायता से उस अग्नि को बुझाकर अत्रि की रक्षा की.
मंत्र 9. गौतम के लिए कुएं से जल
परावतं नासत्यानुदेथामुच्चाबुध्न॑ चक्रथुर्जिह्यबारम्.
क्षरत्नापो न पायनाय राये सहस्राय तृष्यते गोतमस्य..
सरल हिंदी अर्थ
हे अश्विनीकुमारों. तुम गौतम ऋषि के समीप आए. तुमने कुएं का मूल ऊपर कर दिया और उसमें से हव्य देने वाले तथा सहनशील गौतम के पीने के लिए जल निकलने लगा.
सरल व्याख्या
इस मंत्र में गौतम ऋषि के लिए जल उपलब्ध कराने का वर्णन है. अश्विनीकुमारों ने कुएं को इस प्रकार ऊपर किया कि उसमें से जल निकलने लगा और गौतम उसे पी सके.
मंत्र 10. वृद्ध च्यवन को पुनः समर्थ बनाना
जुजुरुषो नासत्योत वर््रिं प्रामुड्चतं द्रापिमिव च्यवानात्.
प्रातिरतं जहितस्यायुर्दस्रादित्पतिमकृणुतं कनी
सरल हिंदी अर्थ
हे अश्विनीकुमारों. तुमने जीर्ण च्यवन ऋषि को व्याधि और वृद्धावस्था से मुक्त करके उन्हें कवच के समान सुरक्षित कर दिया. तुम्हारे द्वारा पुरुरवा च्यवन का जीवन बढ़ाया गया और उन्हें कन्याओं का पति बनाया गया.
सरल व्याख्या
यह सूक्त का प्रसिद्ध प्रसंग है. च्यवन ऋषि वृद्ध हो चुके थे. स्रोत में बताया गया है कि अश्विनीकुमारों ने उन्हें वृद्धावस्था और दुर्बलता से मुक्त किया तथा उनका जीवन बढ़ाया.
मंत्र 11. नेता रूप अश्विनीकुमार और दधीचि का प्रसंग
तद्धां नरा शंस्य॑ राध्यं चाभिष्टिमन्नासत्या वरूथम्.
यद्विद्वांसा निधिमिवापगूव्ठहमुद्दर्शतादूपथुर्वन्दनाय..
सरल हिंदी अर्थ
हे नेता रूप अश्विनीकुमारों. तुमने गुप्त धन के समान कुएं में छिपे दधीचि ऋषि को जानकर वहां से बाहर निकाला. तुम्हारा यह कार्य चाहने योग्य, वरणीय और प्रशंसनीय है.
सरल व्याख्या
इस मंत्र में दधीचि ऋषि का उल्लेख मिलता है. स्रोत के अनुसार अश्विनीकुमारों ने उन्हें गुप्त धन के समान छिपे स्थान से बाहर निकाला.
मंत्र 12. दधीचि से जुड़ा प्रसंग
तद्वां नरा सनये दंस उग्रमाविष्कृणोमि तन््यतुर्न वृष्टिम्,
दध्यड़ू ह यन्मध्वाथर्वणो वामश्वस्य शीर्ष्णा प्र यदीमुवा
सरल हिंदी अर्थ
हे अश्विनीकुमारों. जिस प्रकार बादल के भीतर जल छिपा रहता है, उसी प्रकार तुम्हारे कार्य से संबंधित प्रसंग में दधीचि का उल्लेख मिलता है. यह कार्य तुम्हारी सहायता और सामर्थ्य को प्रकट करता है.
सरल व्याख्या
इस भाग में दधीचि से संबंधित प्रसंग आगे बढ़ता है. स्रोत की व्याख्या में इसे बादल और उसके भीतर छिपे जल के उदाहरण से समझाया गया है.
मंत्र 13. ऋषि वर्धमति और हिरण्यहस्त
अजोहवीजन्नासत्या करा वां महे यामन्पुरुभुजा पुरन्धि:.
श्रुतं तच्छासुरिव वश्रिमत्या हिरण्यहस्तमश्विनावदत्त
सरल हिंदी अर्थ
हे लंबे हाथों वाले अश्विनीकुमारों. परम बुद्धिमती ऋषिपत्नी वर्धमति ने अपने स्तोत्र में तुम्हें बार-बार बुलाया था. तुमने शिष्य के समान उसकी पुकार सुनी और उसे हिरण्यहस्त नाम का पुत्र दिया.
सरल व्याख्या
इस मंत्र में वर्धमति का उल्लेख है. वह अश्विनीकुमारों की स्तुति करती हैं और उनसे सहायता की कामना करती हैं. स्रोत के अनुसार अश्विनीकुमारों ने उनकी प्रार्थना सुनकर उन्हें हिरण्यहस्त नामक पुत्र प्रदान किया.
मंत्र 14. वक और वर्तिका की रक्षा
आस्नो वृकस्य वर्तिकामभीके युव॑ नरा नासत्यामुमुक्तम्.,
उतो कविं पुरुभुजा युवं ह कृपमाणमकृणुत॑ विचक्षे..
सरल हिंदी अर्थ
हे नेताओं. तुमने वक और वर्तिका के संग्राम में वक के मुख से वर्तिका को छुड़ाया. तुमने स्तुति करने वाले विद्वान को यह देखने की शक्ति दी.
सरल व्याख्या
इस मंत्र में वक और वर्तिका से संबंधित घटना का वर्णन है. वर्तिका संकट में थी और अश्विनीकुमारों ने उसे वक से छुड़ाया.
मंत्र 15. खेल राजा और विश्पला
चरित्र हि वेरिवाच्छेदि पर्णमाजा खेलस्य परितक्म्यायाम्.
सद्यो जड़्घामायसीं विश्पलायै धने हिते सर्तवे प्रत्यधत्तम्..
सरल हिंदी अर्थ
हे अश्विनीकुमारों. जिस प्रकार पथ में आगे बढ़ने वाला व्यक्ति अपने मार्ग पर जाता है, उसी प्रकार खेल राजा के लिए तुमने विश्पला के टूटे हुए पैर के स्थान पर लोहे का पैर लगाया, ताकि वह युद्ध में चल सके.
सरल व्याख्या
यह मंत्र विश्पला के प्रसंग का उल्लेख करता है. स्रोत के अनुसार उसका पैर टूट गया था. अश्विनीकुमारों ने उसके स्थान पर लोहे का पैर लगाया और उसे फिर से चलने योग्य बनाया.
मंत्र 16. रेभ की रक्षा
शतं मेषान्वृक्ये चक्षदानमृज़ाश्रव॑ं तं पितान्ध॑ चकार.,
तस्मा अक्षी नासत्या विचक्ष आघतं दस्रा भिषजावनर्वन्..
सरल हिंदी अर्थ
हे अश्विनीकुमारों. ऋभु ने अपनी स्तुति के भोजन के लिए सौ भेड़ों को काट दिया था. इसके बाद तुमने रेभ को पानी में डूबने से बचाया और उसके शरीर की रक्षा की.
सरल व्याख्या
इस मंत्र में रेभ के संकट का उल्लेख है. अश्विनीकुमारों ने उसे जल में डूबने से बचाया और सुरक्षित किया.
मंत्र 17. दीर्घायु की प्रार्थना
आवां रथं दुहिता सूर्यस्य कार्ष्मेवातिष्ठदर्वता जयन्ती.
विश्वे देवा अन्वमन्यन्त हृद्धिः समु श्रिया नासत्या सचेथे..
सरल हिंदी अर्थ
हे अश्विनीकुमारों. मैंने तुम्हारे पुराने कार्यों का वर्णन किया है. मैं सुंदर गायों और वीरों का स्वामी होने के साथ-साथ राष्ट्र का स्वामी बनूं. जैसे घर का स्वामी अपने घर में बाधा के बिना प्रवेश करता है, उसी प्रकार मैं भी दीर्घ आयु भोगकर वृद्धावस्था में प्रवेश करूं.
सरल व्याख्या
इस मंत्र में स्तुति करने वाला व्यक्ति अपने लिए समृद्धि, वीरों और पशुधन की प्राप्ति तथा राष्ट्र के स्वामित्व की इच्छा प्रकट करता है. साथ ही वह लंबी आयु की कामना करता है.
मंत्र 18. दिवोदास के लिए अन्न
यदयातं दिवोदासाय वर्तिर्भरद्वाजायाश्विना हयन्ता.
रेवदुवाह सचनो रथो वां वृषभश्च शिशुंमारश्न युक्ता..
सरल हिंदी अर्थ
हे अश्विनीकुमारों. दिवोदास ने अन्न रूप में तुम्हारी स्तुति की थी. तुम उसके घर आए. उस समय तुम्हारी सेवा करने वाला रथ बना हुआ था और उसमें घोड़े तथा अन्य साधन जुड़े थे.
सरल व्याख्या
इस मंत्र में दिवोदास का उल्लेख मिलता है. अश्विनीकुमारों के दिवोदास के घर आने और उनकी सेवा किए जाने का वर्णन किया गया है.
मंत्र 19. अन्न और धन की प्राप्ति
रयिं सुक्षत्रं स्वपत्यमायु: सुवीर्य नासत्या वहन्ता.
आ जह्ढावीं समनसोप वाजैस्त्रिरह्लो भागं दधतीमयात
सरल हिंदी अर्थ
हे अश्विनीकुमारों. समान मन वाले तुम दोनों सुंदर बल, धन, संतान और सुंदर शरीर वाले अन्न लेकर जदु ऋषि के पास गए. उन्होंने दिव्य अन्न के साथ प्रतिदिन यज्ञ के लिए तुम्हें अर्पण किया.
सरल व्याख्या
इस मंत्र में अश्विनीकुमारों के द्वारा अन्न, धन, संतान और सामर्थ्य प्रदान करने का वर्णन मिलता है. जदु ऋषि द्वारा उनके लिए यज्ञ किए जाने का भी उल्लेख है.
मंत्र 20. जरत् ऋषि और जादुई रथ
परिविष्टं जाहुषं विश्वत: सीं सुगेभिर्नक्तमूहथू रजोभि:.
विभिन्दुना नासत्या रथेन वि पर्वताँ अजरयू अयातम्..
सरल हिंदी अर्थ
हे अश्विनीकुमारों. जरत् ऋषि को दोनों शत्रुओं द्वारा चारों ओर से घेर लिए जाने पर तुमने उन्हें अपने सर्वभेदक लोहे से निर्मित रथ द्वारा रात में सरल मार्ग से बाहर निकाला. फिर वे पर्वत पर चले गए, जहां शत्रु नहीं चढ़ सकते थे.
सरल व्याख्या
यह मंत्र संकट में घिरे जरत् ऋषि की रक्षा का वर्णन करता है. अश्विनीकुमारों ने उन्हें शत्रुओं से बचाकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया.
मंत्र 21. वश ऋषि की रक्षा
एकस्या वस्तोरावतं रणाय वशमश्वचिना सनये सहस्रा.
निरहतं दुच्छुना इन्द्रवन्ता पृथुश्रवसो वृषणावराती:
सरल हिंदी अर्थ
हे अश्विनीकुमारों. तुमने वश ऋषि की इसलिए रक्षा की कि वे एक दिन में हजार धन प्राप्त कर सकें. हे कामवर्षी. तुमने इंद्र के साथ मिलकर पशुधन को छीनने वाले शत्रुओं को मार दिया.
सरल व्याख्या
इस मंत्र में वश ऋषि के लिए अश्विनीकुमारों की सहायता का उल्लेख है. उनके धन और पशुधन की रक्षा के लिए शत्रुओं के विनाश का वर्णन किया गया है.
मंत्र 22. कुएं से जल निकालना
शरस्य चिदार्चत्कस्यावतादा नीचादुच्चा चक्रथु: पातवे वा:.
शयवे चिन्नासत्या शचीभिर्जसुरये स्तर्य पिप्यथुर्गा
सरल हिंदी अर्थ
हे अश्विनीकुमारों. तुमने कुएं के नीचे जल को ऊपर उठाया, जिससे तुम्हारा स्तोता और ऋचक नामक पुरुष जल पी सके. स्रोत में यह भी बताया गया है कि सूखी हुई गाय को तुमने अपने कर्म से दूध देने योग्य बनाया.
सरल व्याख्या
इस मंत्र में फिर से जल उपलब्ध कराने की घटना का उल्लेख मिलता है. अश्विनीकुमारों ने कुएं के नीचे स्थित जल को ऊपर उठाया ताकि स्तुति करने वाला व्यक्ति जल प्राप्त कर सके.
मंत्र 23. विष्पला से संबंधित प्रसंग
अवस्यते स्तुवते कृष्णियाय ऋजूयते नासत्या शचीभि:.
पशुं न नष्टमिव दर्शनाय विष्णाप्वं ददथुर्विश्वकाय..
सरल हिंदी अर्थ
हे अश्विनीकुमारों. कृष्ण के पुत्र विष्पला ऋषि ने अपनी रक्षा की इच्छा से तुम्हारी स्तुति की. जैसे कोई व्यक्ति अपने धन को सुरक्षित रखता है, उसी प्रकार तुमने उसकी रक्षा की और उसके खोए हुए पुत्र विष्णु को उसे दिखा दिया.
सरल व्याख्या
इस मंत्र में कृष्ण के पुत्र विष्पला का उल्लेख मिलता है. अश्विनीकुमारों से उसकी रक्षा की प्रार्थना की गई और स्रोत के अनुसार उन्होंने उसके खोए हुए पुत्र विष्णु को दिखाया.
मंत्र 24. रेम की समुद्र से रक्षा
दश रात्रीरशिवेना नव द्यूनवनद्धं श्रथितमप्स्वशन्त
विप्रुतं रेभमुदनि प्रवृक्तमुन्जिन्यथु: सोममिव खुवे
सरल हिंदी अर्थ
हे अश्विनीकुमारों. रेम को असुर शत्रुओं ने बांधकर कुएं में डाल दिया था. वह दुखी था और जल से भीगा हुआ था. जिस प्रकार सूर्य की सहायता से सोमरस निकलता है, उसी प्रकार तुमने उसे कुएं से बाहर निकाला.
सरल व्याख्या
यह मंत्र रेम नामक व्यक्ति की रक्षा का वर्णन करता है. उसे शत्रुओं ने बांधकर कुएं में डाल दिया था. अश्विनीकुमारों ने उसे उस संकट से बाहर निकाला.
मंत्र 25. अश्विनीकुमारों से समृद्धि और दीर्घायु की कामना
प्र वां दंसांस्यश्विनाववोचमस्य पति: स्यां सुगव: सुवीर:.
उत पश्यन्नश्नुवन्दीर्घमायुरस्तमिवेज्जरिमाणं जगम्याम्..
सरल हिंदी अर्थ
हे अश्विनीकुमारों. जैसे सुंदर और वीर गायों का स्वामी अपने धन का स्वामी होता है, वैसे ही मैं राष्ट्र का स्वामी बनूं. जैसे घर का स्वामी अपने घर में बिना बाधा के प्रवेश करता है, वैसे ही मैं भी संसार को देखते हुए दीर्घ आयु प्राप्त कर वृद्धावस्था में प्रवेश करूं.
सरल व्याख्या
अंतिम मंत्र में स्तुति करने वाला व्यक्ति अश्विनीकुमारों से समृद्धि, पशुधन, वीरता, राष्ट्र के स्वामित्व और दीर्घ आयु की कामना करता है.
सूक्त 116 का सार
ऋग्वेद मंडल 1 का सूक्त 116 अश्विनीकुमारों की स्तुति और उनके द्वारा किए गए अनेक सहायता-कार्यों का विस्तृत वर्णन करता है.
इस सूक्त में भुज्यु को समुद्र से बचाने, उसे सुरक्षित घर पहुंचाने, अत्रि ऋषि को अग्नि से बचाने, गौतम ऋषि के लिए कुएं से जल उपलब्ध कराने और वृद्ध च्यवन ऋषि को पुनः समर्थ बनाने जैसे प्रसंग आते हैं.
इसी प्रकार दधीचि, वर्धमति, वर्तिका, विश्पला, रेभ, दिवोदास, जदु, जरत् और वश जैसे अनेक पात्रों से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख मिलता है.
इन मंत्रों में अश्विनीकुमारों का स्वरूप मुख्य रूप से सहायता करने वाले, संकट से बचाने वाले, शीघ्र पहुंचने वाले और इच्छित वस्तु प्रदान करने वाले देवताओं के रूप में सामने आता है.
सूक्त के अंतिम मंत्रों में स्तुति करने वाला व्यक्ति स्वयं के लिए गाय, वीर, धन, राष्ट्र और दीर्घ आयु की कामना करता है.