ऋग्वेद में वायु देव का महत्व: सूक्त 2 का सरल अर्थ और व्याख्या
ऋग्वेद के प्रथम मंडल के दूसरे सूक्त में वायु देव की स्तुति की गई है. वैदिक साहित्य में वायु को केवल हवा नहीं माना गया, बल्कि उन्हें सम्पूर्ण जीवन की प्राणशक्ति और गति का आधार समझा गया है. ऋषि वायु देव से प्रार्थना करते हैं कि वे यज्ञ में उपस्थित हों, सोमरस ग्रहण करें और…