श्रीमद्भागवत महात्म्य (भाग 2) : संवाद का आरंभ
संवाद की पहली झलक अब जो पहले केवल एक भाव की तरह उपस्थित था, वह धीरे-धीरे संवाद का रूप लेने लगता है. वातावरण अब केवल संकेतों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसमें कुछ स्पष्टता आने लगती है. ऐसा लगता है जैसे कोई स्थान है जहाँ कुछ लोग एकत्र हैं और उनके भीतर एक जिज्ञासा है,…