ऋग्वेद मंडल 1 सूक्त 27: अग्नि देव से रक्षा, धन और यज्ञ की सफलता की प्रार्थना
ऋग्वेद के प्रथम मंडल का सूक्त 27 भी अग्नि देव को समर्पित है. इस सूक्त में ऋषि अग्नि की स्तुति करते हुए उनसे रक्षा, धन, अन्न, यज्ञ की सफलता और शत्रुओं पर विजय की प्रार्थना करते हैं. अनेक मंत्रों में अग्नि को यजमान का हितकारी और देवताओं तक यज्ञ पहुंचाने वाला बताया गया है.
अग्नि की स्तुति
सूक्त के प्रारंभ में अग्नि की स्तुति की गई है.
ऋषि उन्हें ऐसे देवता के रूप में स्मरण करते हैं जो यज्ञ को सफल बनाते हैं और यजमान की प्रार्थनाओं को स्वीकार करते हैं. वे अग्नि से प्रसन्न होकर यज्ञ में आने की प्रार्थना करते हैं.
रक्षा की कामना
सूक्त में बार-बार अग्नि से रक्षा की प्रार्थना की गई है.
ऋषि उनसे निवेदन करते हैं कि वे शत्रुओं और विरोधियों से उनकी रक्षा करें. साथ ही वे पाप करने वालों और हानि पहुंचाने वालों से भी सुरक्षा की कामना करते हैं.
इन मंत्रों में अग्नि को रक्षक के रूप में संबोधित किया गया है.
अन्न और धन की प्राप्ति
सूक्त में अग्नि से अन्न और धन देने की प्रार्थना भी की गई है.
ऋषि चाहते हैं कि अग्नि उन्हें जीवन के लिए आवश्यक साधन प्रदान करें और उनके परिवार का कल्याण करें. यज्ञ के माध्यम से समृद्धि प्राप्त करने की कामना इन मंत्रों में दिखाई देती है.
हवि स्वीकार करने की प्रार्थना
अनेक मंत्रों में अग्नि से निवेदन किया गया है कि वे अर्पित हवि को स्वीकार करें.
ऋषि चाहते हैं कि अग्नि यज्ञ में उपस्थित होकर देवताओं तक अर्पण पहुंचाएं और यजमान की प्रार्थनाओं को सफल बनाएं.
शत्रुओं पर विजय की कामना
सूक्त में युद्ध और संघर्ष का भी उल्लेख मिलता है.
ऋषि अग्नि से प्रार्थना करते हैं कि वे कठिन परिस्थितियों में सहायता करें और विजय प्राप्त करने में सहयोग दें. उनसे बल और साहस प्रदान करने की भी कामना की गई है.
सभी लोगों द्वारा पूजित अग्नि
सूक्त में कहा गया है कि अनेक लोग अग्नि की उपासना करते हैं और उन्हें सम्मान देते हैं.
ऋषि भी उसी श्रद्धा के साथ अग्नि की स्तुति करते हैं और उनसे कृपा की याचना करते हैं. वे चाहते हैं कि अग्नि उनकी प्रार्थना सुनें और उन्हें अपने संरक्षण में रखें.
यज्ञ और स्तुति को स्वीकार करने की प्रार्थना
सूक्त के अंतिम मंत्रों में अग्नि से कहा गया है कि वे यज्ञ और स्तुति को स्वीकार करें.
ऋषि उन्हें बार-बार नमस्कार करते हैं और उनसे अनुग्रह की कामना करते हैं. वे चाहते हैं कि अग्नि उनकी पुकार सुनें और उन्हें निरंतर कल्याण प्रदान करें.