अथर्ववेद कांड 1 (भाग 10) : एक व्यापक दृष्टि की ओर संकेत
जहाँ सब कुछ एक साथ दिखाई देता है अब तक जो अलग-अलग रूपों में सामने आता रहा – वाणी, प्रवाह, ऊर्जा, शरीर, संतुलन, प्रकृति और शक्ति – वह यहाँ आकर जैसे एक साथ दिखाई देने लगता है. यह कोई नया विषय नहीं लाता बल्कि जो पहले से था, उसे एक व्यापक दृष्टि में रख देता…