ऋग्वेद मंडल 1 सूक्त 59 | वैश्वानर अग्नि का दिव्य स्वरूप और वैदिक रहस्य
ऋग्वेद के प्रथम मंडल का सूक्त 59 अग्निदेव के उस विराट स्वरूप का वर्णन करता है जिसे वैश्वानर कहा गया है. यहाँ अग्नि केवल यज्ञकुंड में प्रज्वलित अग्नि नहीं हैं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि में व्याप्त दिव्य चेतना, जीवन को धारण करने वाली ऊर्जा और समस्त प्राणियों के भीतर विद्यमान शक्ति के रूप में प्रस्तुत किए…