ऋग्वेद मंडल 1 सूक्त 60 | अग्निदेव – यज्ञ के पुरोहित, रक्षक और देवदूत
ऋग्वेद के प्रथम मंडल का सूक्त 60 अग्निदेव के उस स्वरूप का परिचय कराता है जो प्रत्येक वैदिक यज्ञ का केंद्र है. यहाँ अग्नि केवल प्रज्वलित अग्निशिखा नहीं हैं, बल्कि देवताओं तक हवि पहुँचाने वाले दूत, यज्ञ के होता, गृह के रक्षक और यजमान के हितैषी के रूप में वर्णित किए गए हैं. इस सूक्त…