पुराणों में सृष्टि की कल्पना : समय, चक्र और अनंत विस्तार
सृष्टि एक बार नहीं बनती आधुनिक सोच अक्सर सृष्टि को एक आरंभिक घटना की तरह देखती है. मानो एक क्षण में सब कुछ बना और फिर समय आगे बढ़ गया. पर पुराणों की दृष्टि अलग संकेत देती है. यहाँ सृष्टि एक बार नहीं बनती. वह बार-बार प्रकट होती है. और फिर नया आरंभ, एक अनंत…