ऋग्वेद मंडल 1 सूक्त 66 | अग्निदेव – मानव के प्रिय अतिथि और यज्ञ के दिव्य नेता
वैदिक साहित्य में अग्निदेव का स्थान केवल यज्ञ की अग्नि तक सीमित नहीं है. वे देवताओं और मनुष्यों के बीच संवाद का माध्यम, प्रत्येक गृह के मंगल के प्रतीक और धर्ममार्ग के पथप्रदर्शक माने गए हैं. ऋग्वेद मंडल 1 का सूक्त 66 इसी आत्मीय और प्रेरणादायक स्वरूप को अत्यंत सुंदर ढंग से प्रस्तुत करता है….