ऋग्वेद मंडल 1 सूक्त 58 | अग्निदेव का दिव्य स्वरूप, यज्ञ और आध्यात्मिक महत्व
ऋग्वेद में अग्नि केवल अग्नि तत्व नहीं हैं. वे देवताओं तक यज्ञ की आहुति पहुँचाने वाले दिव्य दूत, यज्ञ के पुरोहित, साधक के मार्गदर्शक और प्रकाश के शाश्वत प्रतीक हैं. यही कारण है कि वैदिक साहित्य में अग्नि को सबसे निकट अनुभव किए जाने वाले देवताओं में स्थान प्राप्त है. प्रथम मंडल का सूक्त 58…