श्रीमद्भागवत महात्म्य (भाग 3) : कथा का विस्तार
संवाद से कथा की ओर अब तक जो केवल प्रश्न और उत्तर के रूप में चल रहा था, वह धीरे-धीरे कथा का रूप लेने लगता है. संवाद अब भी मौजूद है, लेकिन उसके भीतर से एक धारा निकलती है, जो किसी घटना या प्रसंग की ओर बढ़ती हुई दिखाई देती है. ऐसा लगता है कि…