श्रीमद्भागवत महात्म्य (भाग 5) : कथा की गहराई और विस्तार
कथा का गहराता हुआ स्वर अब तक जो कथा अपने प्रवाह में आगे बढ़ रही थी, वह यहाँ थोड़ी और गहरी होती दिखाई देती है. घटनाएँ केवल क्रम में नहीं आतीं, बल्कि उनके भीतर एक ऐसा भाव जुड़ने लगता है जो पहले संकेत के रूप में था और अब थोड़ा स्पष्ट अनुभव होने लगता है….