ऋग्वेद मंडल 1 सूक्त 64 | मरुतगण का दिव्य स्वरूप, वर्षा और अद्भुत पराक्रम
जब ऋग्वेद में प्रकृति की गतिशील शक्तियों का वर्णन किया जाता है, तब मरुतगण का नाम अत्यंत आदर और उत्साह के साथ लिया जाता है. वे केवल वर्षा लाने वाले देवता नहीं हैं, बल्कि वेग, ऊर्जा, सामूहिक शक्ति, परिवर्तन और जीवनदायी प्रकृति के प्रतीक माने गए हैं. प्रथम मंडल का सूक्त 64 इन्हीं मरुतगणों की…