ईशावास्य उपनिषद मंत्र 7–8: एकत्व का ज्ञान और परमात्मा का स्वरूप
ईशावास्य उपनिषद के पूर्व मंत्रों (1–6) में यह स्पष्ट किया गया कि सम्पूर्ण जगत में ईश्वर का वास है और मनुष्य को त्याग, कर्म और समभाव के साथ जीवन जीना चाहिए. अब मंत्र 7 और 8 में उपनिषद हमें और गहराई में ले जाता है, जहाँ: इन गूढ़ विषयों को अत्यंत सूक्ष्म रूप से समझाया…