श्रीमद्भागवत महात्म्य (भाग 7) : समापन की ओर बढ़ती धारा
एक धीमी पूर्णता अब तक जो कथा धीरे-धीरे खुलती हुई आगे बढ़ रही थी, वह यहाँ एक शांत पूर्णता की ओर जाती हुई दिखाई देती है. यह पूर्णता किसी अंतिम निष्कर्ष की तरह नहीं आती, बल्कि एक ऐसे बिंदु की तरह आती है जहाँ गति अपने आप धीमी हो जाती है. जो कुछ पहले कहा…