श्रीमद्भागवत पुराण (स्कंध 1, अध्याय 1) : प्रश्न से आरंभ होती धारा
एक शांत आरंभ यहाँ शुरुआत किसी घटना से नहीं होती, बल्कि एक स्मरण से होती है. एक ऐसा स्मरण जो भीतर एक स्थिरता लाता है. शब्दों में एक लय है, लेकिन उस लय के पीछे एक गहरी शांति भी है. ऐसा लगता है कि जो कहा जा रहा है, वह केवल सुनने के लिए नहीं,…