पुराणों में प्रतीक और अर्थ : कथाओं के भीतर छिपी दृष्टि
प्रतीक को लेकर आम गलतफ़हमी पुराणों की कथाओं को पढ़ते समयअक्सर एक समस्या सामने आती है. कथाएँ या तोपूरी तरह सच मानी जाती हैंया पूरी तरह असंभव कहकरनकार दी जाती हैं. इन दोनों दृष्टियों मेंएक साझा कमी है.दोनों ही प्रतीकात्मक स्तर कोदेखने से चूक जाती हैं. पुराणों की कथाएँशाब्दिक नहीं,प्रतीकात्मक भाषा में बात करती हैं….