अथर्ववेद कांड 1 (भाग 9) : शक्ति, संरक्षण और जीवन की दिशा
जहाँ जीवन अपनी रक्षा करता है अब तक जो प्रवाह, संतुलन और सहयोग की बात सामने आई थी, वह यहाँ एक और रूप में दिखाई देती है. इस बार ध्यान उस शक्ति की ओर जाता है जो जीवन को बनाए रखने के साथ-साथ उसकी रक्षा भी करती है. यह रक्षा बाहर से थोपी हुई नहीं…