अथर्ववेद कांड 1 (भाग 2) : रोग, जीवन शक्ति और संतुलन
जहाँ जीवन स्वयं को संभालता है पहले सूक्त में जहाँ वाणी और मेधा की दिशा सामने आई थी, वहीं आगे बढ़ते हुए ध्यान अब जीवन की उन स्थितियों की ओर जाता है जहाँ संतुलन बनाए रखना आवश्यक हो जाता है. यहाँ विषय थोड़ा बदलता है, लेकिन उसका आधार वही रहता है – एक ऐसी शक्ति…