ऋग्वेद मंडल 1 सूक्त 67 | अग्निदेव – यज्ञ के रक्षक, समृद्धि के दाता और धर्म के संरक्षक
ऋग्वेद के प्रथम मंडल का सूक्त 67 अग्निदेव के ऐसे स्वरूप का परिचय कराता है जो केवल यज्ञ की वेदी तक सीमित नहीं है. इस सूक्त में अग्नि को यज्ञ के संरक्षक, देवताओं के विश्वसनीय दूत, पृथ्वी और आकाश को धारण करने वाली दिव्य शक्ति तथा धर्मपूर्वक जीवन जीने वालों के कल्याणकारी मार्गदर्शक के रूप…