ऋग्वेद का पहला मंत्र “अग्निमीळे पुरोहितम्” का अर्थ और महत्व
ऋग्वेद का प्रारंभ जिस मंत्र से होता है, वह है: “अग्निमीळे पुरोहितम्…” यह केवल एक वैदिक मंत्र नहीं, बल्कि सम्पूर्ण वैदिक परंपरा की दिशा को प्रकट करने वाला उद्घोष माना जाता है. ऋग्वेद में अग्नि देव को विशेष महत्व दिया गया है, क्योंकि वे यज्ञ, ऊर्जा, प्रकाश और चेतना के प्रतीक माने जाते हैं. जैसा…