पुराण और इतिहास : क्या इन्हें एक ही दृष्टि से पढ़ा जा सकता है
इतिहास बनाम कल्पना की बहस कहाँ से आई जब आधुनिक शिक्षा प्रणाली नेइतिहास को तिथियों, प्रमाणों और क्रमबद्ध घटनाओं तक सीमित किया,तब स्वाभाविक रूप से यह प्रश्न उठा किपुराण इस परिभाषा में कहाँ फिट होते हैं. देवता, असुर, दीर्घायु पात्र,और असामान्य घटनाएँआधुनिक ऐतिहासिक दृष्टि को असहज करती हैं. यहीं से यह धारणा बनी किया तो…