श्रीमद्भागवत पुराण (स्कंध 1, अध्याय 3) : अवतारों की झलक
धारा का नया रूप अब तक संवाद एक दिशा बना रहा था, लेकिन यहाँ वह एक अलग रूप में सामने आता है. शब्दों में अब केवल प्रश्न और उत्तर नहीं रहते, बल्कि उनमें एक विस्तार दिखाई देता है. ऐसा लगता है कि जो अब तक संकेत में था, वह अब विभिन्न रूपों में सामने आने…