सुषुप्ति और तुरिया : मांडूक्य उपनिषद चेतना की गहराई को कैसे देखता है
अनुभव का शांत स्तर
मांडूक्य उपनिषद जब चेतना की अवस्थाओं की चर्चा करता है तो वह जाग्रत और स्वप्न के बाद एक तीसरी अवस्था का उल्लेख करता है जिसे सुषुप्ति कहा गया है.
सुषुप्ति सामान्य रूप से गहरी नींद की अवस्था मानी जाती है. इस अवस्था में व्यक्ति न बाहरी संसार का अनुभव करता है और न ही स्वप्न देखता है.
यह एक ऐसी स्थिति होती है जहाँ अनुभव शांत हो जाता है. मन की गतिविधियाँ भी बहुत कम हो जाती हैं.
फिर भी जब व्यक्ति जागता है तो उसे यह अनुभव होता है कि उसने गहरी नींद ली थी.
इसी कारण मांडूक्य उपनिषद इस अवस्था को भी चेतना के अध्ययन का एक महत्वपूर्ण भाग मानता है.
सुषुप्ति का संकेत
सुषुप्ति अवस्था में व्यक्ति किसी विशेष वस्तु या विचार का अनुभव नहीं करता. लेकिन चेतना पूरी तरह समाप्त भी नहीं होती.
यदि चेतना पूरी तरह समाप्त हो जाए तो जागने के बाद हमें यह स्मरण भी नहीं होगा कि हम सोए थे.
इसलिए मांडूक्य उपनिषद इस अवस्था को अनुभव की एक शांत पृष्ठभूमि के रूप में देखता है.
यह एक ऐसी स्थिति है जहाँ अनुभव तो नहीं होता, लेकिन अनुभव की संभावना बनी रहती है.
चौथी अवस्था
मांडूक्य उपनिषद केवल इन तीन अवस्थाओं पर ही नहीं रुकता. वह एक चौथी अवस्था का भी उल्लेख करता है जिसे तुरिया कहा गया है.
तुरिया का अर्थ सामान्य रूप से “चौथा” होता है. लेकिन यह केवल एक और अवस्था नहीं है.
उपनिषद के अनुसार यह वह आधार है जिसके कारण बाकी तीन अवस्थाएँ संभव होती हैं.
जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति बदलती रहती हैं. लेकिन तुरिया को स्थिर और मूल चेतना के रूप में समझाया गया है.
वर्णन से परे
मांडूक्य उपनिषद तुरिया के बारे में कहते समय बहुत सावधानी से शब्दों का उपयोग करता है.
यह कहता है कि इसे पूरी तरह किसी परिभाषा में बाँधना आसान नहीं है. इसे न पूरी तरह जाग्रत कहा जा सकता है, न स्वप्न और न ही सुषुप्ति.
यह उन सबका आधार है, लेकिन उनसे अलग भी है.
इसी कारण इसे समझने के लिए केवल शब्दों से अधिक गहरी जागरूकता की आवश्यकता बताई गई है.
ॐ और चेतना
मांडूक्य उपनिषद इन अवस्थाओं को ॐ के साथ भी जोड़ता है. अ, उ और म की ध्वनियों को तीन अवस्थाओं से जोड़ा जाता है.
इसके बाद ॐ के उच्चारण के बाद जो मौन आता है, उसे कभी-कभी तुरिया के संकेत के रूप में भी देखा जाता है.
इस प्रकार यह उपनिषद ध्वनि, अनुभव और चेतना को एक साथ समझाने की कोशिश करता है.
ॐ की चर्चा इस विचार को समझने में मदद करती है.
एक छोटा चिंतन
हम हर दिन जागते हैं, स्वप्न देखते हैं और सोते हैं. ये तीनों अवस्थाएँ हमारे जीवन का हिस्सा हैं.
लेकिन मांडूक्य उपनिषद यह संकेत देता है कि इन अनुभवों के पीछे भी एक स्थिर पृष्ठभूमि हो सकती है.
यदि उस पृष्ठभूमि को समझने की दिशा में ध्यान दिया जाए, तो चेतना की प्रकृति को नए तरीके से देखा जा सकता है.
संदर्भ
मांडूक्य उपनिषद के मंत्रों में चेतना की चार अवस्थाओं की चर्चा
सुषुप्ति को गहरी नींद की अवस्था के रूप में समझाना
तुरिया को मूल चेतना के संकेत के रूप में देखना
उपनिषद परंपरा में चेतना के अध्ययन की परंपरा